द्वारा जितेन्द्र शाह
नया क्या है? सिस्टम स्तर पर सहायता :
आज तक भारतीय भाषाओं में संगणक लेखन सीमित था। ऑपरेटिंग सिस्टेम ASCII कोड पर आधारित था, इसलिए हमें ऑपरेटिग सिस्टेम से कोइ भी सहायता नहीं मिली। हमारे पास दो विकल्प थे- १. हिन्दी लिपी को २५६ चिन्हों और उतने ही कोडों में सीमित रखें अथवा २.चिन्हों व कोडों की संख्या बढाकर। यह संभव था(है) कि विशिष्ट तकनीकों का प्रयोग करके GNU सिस्टम पर भी २५६ कोडों में भारतीय भाषाओं के सभी अक्षरों को रचा जाए। बहुत सी भाषाओं के लिए आज इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। परन्तु इसमें कुछ सीमाएं हैं। ये कुछ भाषाओं जैसे कि देवनागरी, अंग्रेजी-देवनागरी, अथवा ऐसी कुछ तक ही सिमित है। कुछ ऐसे प्रोग्राम भी हैं जो कईं भारतीय भाषाओं के लिए उपयोगी हैं। उदाहरण के लिए आकृति, APS Fonts,C-DAC's ISM इत्यादि।
युनीकोड
युनीकोड के ISO विधानों के उपयोग में लाने से, जो कि युनिकोड के ससामयिक है, युनीकोड तेजी से प्रसिद्ध् हो रहा है। युनीकोड और अधिक अच्छा तथा तत्सामयीक है। युनीकोड ऑपरेटिंग सिस्टेम के लिए अनुकूल और व्यापक है। स्वाभाविक रूप से GNU/Linux ने युनीकोड को अनुकूल सिस्टम दिया।
आंतर्राष्ट्रीयकरण और स्थानीयकरण (Internationalisation and localisation)
हमारा उद्देश्य यह है कि हम बहुभाषीय लेखन प्रणाली को मुक्त सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके संगणक पर भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराएँ। इसका एक तरीका यह है कि (जो अभी तक असाधारण विक्रेताओं द्वारा किया गया है) प्रोग्रामों को भारतीय भाषाओं में लिखें। परन्तु इस प्रकार के परिवर्तन से मूल कठिनाई यह है कि इसकी सभी विशेषताओं को दर्शाना कठिन होगा। इसलिए हमें कुछ ऐसे अनुप्रयोग बनाने पडेंगे जो कि शीघ्र ही भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हों और साथ ही उसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तन किया जा सके। फिर से नए सिरे से आरम्भ करने से बेहतर यह होगा कि कार्यक्रम(program) के तर्क में बदलाव किए बिना केवल उसके बाह्य स्वरूप को उस भाषा के अनुसार बदला जाए। अतः हर एक कार्यक्रम(program) में अलग-अलग से भारतीय भाषाओं का समावेश करने के बजाय एक ऐसी प्रणाली उपलब्ध हो जो कि शीघ्रता से उनका स्थानीयकरण कर सकें। साथ ही यह प्रणाली केंद्रीकृत रूप से एवं निःशुल्क भाव से इसमें सुधार लाती रहे।
आंतर्राष्ट्रीयकरण एवम् स्थानीयकरण
आंतर्राष्ट्रीयकरण एवम् स्थानीयकरण की शुरूआत जीएनयु के द्वारा की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया को प्रामाणिक एवम् सुलभ बनाना हैं। फिर से नए सिरे से आरम्भ करने से बेहतर यह होगा कि कार्यक्रम (program) के तर्क में बदलाव किए बिना केवल उसके बाह्य स्वरूप को उस भाषा के अनुसार बदला जाए। अतः हर एक कार्यक्रम (program) में अलग से भारतीय भाषाओं का समावेश करने के बजाय एक ऐसी प्रणाली उपलब्ध हो जो कि शीघ्रता से कार्यक्रम का स्थानीयकरण कर सकें और साथ ही केन्द्रीकृत तरीके से इसमें बदलाव किया जा सके। यह पूणर्त: निःस्वार्थ भाव से की गई कोशिश हैं।
अनुवाद
अनुवाद पूर्णतः तकनीकी कार्य नहीं है। शुध्द अनुवाद के लिए संगणक की जानकारी आवश्यक है। जबकि हम यह नहीं चाहते कोई निपुण प्रोग्रामर अपनी कला और समय अनुवाद के लिए उपयोग करें परंतु प्रोग्रामिंग/एप्लिकेशन तथा भाषा की जानकारी से निश्चित हीवे बेहतर अनुवाद कर सकेंगे। अनुवाद कुछ समय के लिये बार-बार करने की प्रक्रिया हो सकती है जिसमें कुछ प्रान्तीय भाषाएँ उभरने की आशा हैं। उदाहरण के लिए, "प्रोग्राम" शब्द के लिये देवनागरी लिपि में "अनुप्रयोग" का इस्तेमाल होता है,अथवा "कार्यक्रम" एक और शब्द जो कि समानार्थी हैं। इस विषमता/विभिन्नता के लिए एकमत जरूरी हैं। एक नियम के अनुसार, मैं व्यक्तिगत रूप से यह विशवास करता हूँ कि जो शब्द सामान्य सभ्यता से जुडे होते हैं वे आसानी से ग्रहण कर लिए जाए जा सकते हैं। किन्तु सभ्यता में जब समानता नहीं होती है, तब एक नया शब्द बनाया जा सकता है। यह स्वाभाविक है कि हिन्दी भाषा के अनेक प्रकारों जैसे कि संस्कृत, आन्ग्ल या खडी बोली/मराठमोळी आदि के लहज़े में अंतर आ जाता है। इस बात के लिए यह आवश्यक है कि इसमें जो भेद हैं वे भी दूर करने में समय लगेगा। यह कठिनाई हमारे अनुसंधान के लिये एक चुनौती है। यह कार्य ऐसी निपुणता से करने के लिये ऐसे साहसी भाषा विद्वानों की जरूरत है। इन्हें अनुवादन में ट्रान्स्लेटर के साथ बैठना पडेगा। हमें कुछ छोटे-स्तर के अनुवादों को नये उत्साही व्यक्तियों से कराना होगा जो कि एडीटरों तथ भाषा-ग्यनियों के साथ मिल कर कुछ टूल की मदद से यह काम करें।
इसमें निम्न व्यक्ति कार्यरत रहेंगे
1. अनुवादक (ट्रांसलेटर)
2. संपादक(एडिटर)
3. प्रवीण(एक्सपर्ट)
हम चाहते हैं कि अनुवादक के लिए यह जरुरी नही होगा कि वह केवल टाइप करने का कार्य करें बल्कि उसे केवल शब्दो का अनुवाद हीं करना है। टाइपींग के लिये एक व्यक्ति की व्यवस्था तबतक की जायेगी जबतक कि वह संगणक प्रयोग में निपुण ना हो जाये। भाषाज्ञानी अनुवादित वाक्यखंडो का परिक्षण करेंगे तथा पूरी जाँच के बाद अपनी सहमती देंगे।
विशिष्ट कार्य
जीयुआई : जीनोम (Gnome) और केडीई (KDE): मुख्य कार्य मूल और लोकप्रिय प्रोग्रामों के मेनु और संदेश मे दिए गए वाक्यों(वाक्यखंडों)का अनुवाद करना है। आपको पता होगा कि जीनयू/लीनक्स कुछ ऐसे लोकप्रिय जीयुआई प्रोग्रामों का उपयोग करता है, जो उनकी प्रोग्राम लाईब्रेरी से सम्बधित है। यह जीनोम, जीटीके की लाईब्रेरी पर आधारित है और केडीई क्युटी की लाईब्रेरी पर आधारित है(एक C में तथा दूसरा C++ में लिखागया है) यद्यपि ज्यादातर प्रोग्राम दोनों में काम करते है, किन्तु कुछ ऐसे प्रोग्राम भी है जो केवल इनमे से किसी एक वातावरण मे ही काम करते है। जबकि जीनोम पूर्ण रूप से निःशुल्क है, QT केवल अव्यावसायिक उपयोग के लिए निःशुल्क है। अनुवाद पर चर्चा : हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम स्क्रीन पर जो लेबल और संदेश किसी एक भाषा मे देखते है वे कई प्रोग्रामों से आते हैं। उदाहरण के लिए फाईल,एडिट,हेल्प इत्यादि जो मुख्य मेनु में दिखता हैं वह जीनोम और केडीई में अलग-अलग फाइलों से आते है। जब भी हम किसी भाषा में अनुवादित वाक्य स्क्रिन पर देखते है तो इन सभी वाक्यो को अनुवादित करने के लिये प्रोग्राम. की आवश्यकता होती हैं। इन सभी वाक्यो को वेबसाइट पर एक भिन्न फाईल .po में रखा गया हैं। हम यह चाहते है कि यह अनुवादित कार्य भिन्न भिन्न लोगों को बांॅटे जिससे कि इसकीकार्यक्षमता को बढ़ाया जा सके।इसके लिये वेबसाइट पर कई स्रोत एवं स्थिति-विवरण को रखा जाएगा। साथ ही यदि आप अपना सहयोग देना चाहते हैं तो वेबसाइट के द्वारा सम्पर्क कर सकते हैं। वर्तमान अनुवाद आगामी अनुवादो के लिए उपलब्ध होगा जिससे अनुवाद का कार्य आसान हो सकेगा। सहायक-अनुवाद और संगठनीकरण के लिए वेतन के आधार एक सहायकको नियुक्त करने का प्रस्ताव भी है। वेबसाइट के देखरेख के लिए कुछ स्वयंसेवको का नियुक्त करेंगे। यदि आप अनुवाद के कार्य में रुचि रखते हैं तो कृपया हमें सम्पर्क करें।
सामान्य कार्य
स्थानीयकरण में बहुत से कार्य है।
1. सिस्टम स्तर की प्रोग्रामिंग (system level programming)अर्थात
1. प्रदर्शन/प्रिंटींग के लिये युनिकोड का आधार
2. छुपाए गए नियमों के द्वारा फौंट को वनाना।
3. एसे फौंट को बनाना जो सभी के द्वारा स्वीकार किये जाये।
4. विशिष्ट लक्षणो की जांच करना।
2. एप्लीकेशन स्तर की प्रोग्रामिंग (Application level programming)
1. साफ्टवेयर में नये लाइब्रेरी को डालना जो कि युनिकोड एवं भारतीय भाषा को आधार दे।
2. एप्लीकेशन के लिये मेनु में सम्बन्धीत लेख एवं वाक्यखण्डो का अनुवाद करना।
बहुत से प्रोग्राम जो कि अनेक भाषाओं में पहले से उपस्थित है को आसानीसे भारतीय भाषाओं में बदला जा सकता है। इसके लिए आंशिक रूप में शास्त्र सम्बन्धी एवं बहुभाषीय निपुणता की आवश्यकता होगी।
हस्तलेखन के लिए भी इस प्रकार के प्रयत्न की आवश्यकता होगी।हम यह प्रार्थना करते है कि आप भी हमारी मदद करे
वर्तमान वस्तु स्थिति:
'progress' प्रोग्रेस बटनपर क्लिक करने पर आप हमारे कार्य को सुचीबध्द रुप में देख सकते हो। इस सुची में यह दर्शाया गया हैं कि अनुवाद का कितना कार्य पूर्ण हो चुका है कितना कार्य बचा है।
भाषाएँ : ज़ीनोम (gnome) प्रोग्राम फ़ाईल के .po फ़ाइल का ७० से ८०% अनुवाद का कार्य हिन्दी मे पुर्ण हो चुका है। (देवनागरी स्क्रीप्ट के द्वारा) यह कार्य हम मराढी और गुजराती में भी प्रारम्भ कर रहे है।
हमारी वेबसाइट
इस साइट को आईआईटी के विधार्थियो एवं शिक्षको के सहयोग से शुरू किया गया। अधिक जानकारी के लिए इस ईमेल आई.डी. पर सम्पर्क करें:
सम्पर्क:
प्रो. जीतेन्द्र शाह ( jituviju@gmail.com )
अन्य सम्पर्क :
* वेंकटेश हरीहरण ( venky1@vsnl.com ), इन्डलिनक्स की तरफ से
* डॉ.जी.नागार्जुन ( nagarjun@hbcse.tifr.res.in ), एफएसएफ की तरफ से
